अतीक कु कतल, पुलिस कु नकामि नी त क्या च ?

माफिया से नेता बण्यां अतीक अहमद अर वैका भै अशरफ तैं पुलिस शरैला जाचं खूंणि अस्पताल लिजाणि छायी तबरि तीन ज्वान नौंनो न ऊथैं गोलि मारि दे। द्विया वखम हि टुणपट ह्वैग्यीं। अतीक पर हत्या, पैसा मंगणा, जन्न 100 से जादा मामला छायी। अशरफ पर 50 मामला दर्ज छायीं।

बहुजन समाज पार्टी क विधायक राजू पाल हत्याकांड क गवाह उमेश पाल तैं हत्या करणा कु आरोप छायी। प्रयागराज के अदालत न 2006 क ऐ मामळा मा अतीक तैं 28 मार्च खूंणि जिन्दगि भरक जेला सजा सूण्यीं छायीं।

इन्न मा अतीक अहमद अर वैक भै अशरफ क हत्या क् बाद उत्तरप्रदेश पुलिस अर प्रदेसा सरकार कानून बन्दबस्त पर कै सवाळ खड़ा हूंणा छन। सवाल की पुलिस सुरक्षा मा अतीक अर अशरफ क् हत्या कैनकैकि ह्वै? सवाल यौं च कि जब पुलिस तैं या बात पता छायीं अर अतीक खळाखळ व्वनु छायीं कि वैंकु कतल ह्वै सकदु , यांका बाद बि पुलिस वैंथैं स्वास्थ्य जांच करणौं खूंणि अस्पताल मा किलै लेकैकि गंई, जबकि या जांच जेल मा बि हवै सकदि छायीं? सवाल त यौं बि च कि कतल करण वलों तैं या बात कनकैकि पता चलि कि ये बगत मा अतीक अस्पताल मा औंणु च?

अतीक बडु मुलजिम छायी यांका बाद बि पुलिस क आंखियौं क समणि द्वियौं तैं कतल कनकैकि ह्वैग्यें? जन कै सवाल छन। क्या यु जाणि बुझिक कर्यें ग्यें, या क पिछनै कोच यू सच समणि आण चैंद? पुलिस क आंखियौं क समणि उन्न तड़ातड गोळि चलिन। बडु सवाल यौं बि च अतीक अर अशरफ तैं बचौंणा त दूर , पुलिसन अप्फु तैं बचौंणा क कोसिस बि नी कायी ? पुलिसन एक बि गोलि बि नी चलें? या पुलिस कु नकामि नी त क्या च?

यु अतीक अर अशरफ कु कतल न बल राम राज्य क सुपिन दय्खण वळों क उमेद तैं बौत बडु झटका च। बडु सवाल यौं बि च कि अपराधियौं हिकमत इतगा बढ़िग्यें कि वु पुलिसा क आंखियौं समणि कतल करणा छन, इन्न बडु सवाल यौं च कि मनखियौं क सुरक्षा कु क्या होलु?

हां या बात सच च कि प्रदेस मा कानून बन्दबस्त अर आम मनखि क सुरक्षा पुलिसा की संवैधानिक जिम्मेबरि च। पुलिसा जिमेबरि त अतीक जन्न माफियौं तैं छ्वटा मा हि खतम करणा क बि च, जै से अतीक जन्न छ्वटा गुंड़ा माफिया नी बणि सक्यां।

सवाल त प्रदेसा रैवासियों पर बि छन जौंन एक छ्वटु-म्वटु लफंडर तैं इतगा बडु माफिया ही नी बण्यें बल माननीय विधायक अर सांसद भि बण्यें दे। सवाल राजनीतिक दळु पर बि छन जौन वैथें सैंति-पाळि माननीय बणौंणा मा मदत कायी।

न्यायालय कु काम अपराधि तैं सजा देंण हि ना बल अपराध कम करण बि च पर उत्तरप्रदेश मा अपराधि क हिकमत इतगा जादा च कि वु पुलिस क समणि हि कानून क मखौल उणाण छन। यु भवैष्य खूंणि खतरा क घण्टी नी त क्या च? यु एक अपराधि क आतंक कु अन्त न बल्कि एक नै अपराधि क आतंक क सुरुवात बि च।

अतीक तैं त न्याय मिळि हि नी च, वैंन जिन्दगि भर ळोगु तैं डरै अर राज कायी। वैंकु आतंक झटका मा खतम ह्वैग्यें। वैंन कबि बि यु नी चितै की मिन कुछ गलत कायी। अतीक तैं तिल तिल म्वरणचौंद छायीं, वैंथैं यु चितौणु जरुरी छायीं की वैंन गलत कायीं, जैकि सजा वैंथै हि ना वैकी कुटम्दरि थैं बि मिलणि च।

अतीक तैं सजा न्यायलय मा हि मिलण चैंद छायीं। किलैकि जब क्वीं अपराधि न्यायिक प्रक्रिया मा च त निसाब सड़कि मा न्यायलय मा हि हूंण चैंद।

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