राजधानी ‘गैरसैंंण’ क नौ पर ठट्ठा (मजाक) करणि च सरकार, देरादूण मा विधानसभा बणाणा खूंणि केन्द्र सरकारन दे अपणि मंजूरी

प्रदेस क राजधानी गैरसैंंण मा हूंण चैंद, इन्नों स्वींण उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों अर शहीदु कु सदनि रायीं।

अर दूसर तरफ गैरसैंण राजनीतिक दळु खूंणि राजनीति करणा कु मुद्दा सदनि रैं लेकिन कभि कै भि राजनीतिक दलन गैरसैंण पर अपणि मंसा साफ नि कायी। एकदा दूबरा राजधानी गैरसैंण कु मुद्दा तातु (गरम) ह्वैग्यें। छुईं इन्न च बल केन्द्र सरकारन देरादूण क रायपुर तोक मा विधानसभा बणाणा खूंणि अपणि मंजूरी दे याली।

देरादूण क रायपुर तोक मा 60 हेक्टर भुंय्यां (जमीन) मा विधानसभा, सचिवालय, अर अधिकारियों, विधायकु खूंणि घार बणाणा कु प्रस्ताव बण्यें ग्यें छायीं। जै खूंणि 75 करोड़ रुप्यों कु प्रस्ताव करे ग्यें। अब केन्द्र सरकारन रायपुर तोक मा विधानसभा बणाणा क मंजूरी दे द्यायी। बस विधायक अर अधिकारियों खूंणि घार बणाणा क मंजूरी अबि नि दें।

जैमा अब वन विभागाक ईं जमीन थैं राज्य सम्पति विभाग थैं दियें जाणा बाकी च।
वन विभाग थैं जमीन देंयें जाणा क बदला मा 7 करोड़ रूप्या नेट वैल्यू कु भुगतान त ह्वै ग्यायी लेकिन भारतीय वन्यजीव संस्थान के एक रिपोर्ट च, जैमा ब्वले ग्यें कि वाइल्ड लाइफ मिटिगेशन एक्शन प्लान मा 15 करोड़ 37 लाख रूप्यों कु भुगतान सरकार थैं करण प्वाड़लु। अर ईं यू पैसा छन जै कारण से यू मामलू अबि रूक्यूं च।

बतै दिंया कि अबि देरादूण क विधान सभा रिस्पना पुळक नजीक पैल्यक विकास भवन मा चलणि च। जख मा जगा कम हूंण कारण से पैल्यक मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा क सरकार मा विधान सभा रायपुर मा बण्यें जाणा कु प्रस्ताव त्यार कैरि छायीं। जै थैं अब केन्द्र सरकाक मंजूरी मिळि ग्यायी। ऐ बारा मा विधानसभा ऋतु खण्डूड़ी कु ब्वन च कि रायपुर मा विधानसभा प्रस्तावति च लेकिन नै विधानसभा रायपुर मा बणाणा क बारा मा अबि उंक दगड़ कैकि कुईं भि बात नि ह्वै।

अब जब केन्द्र सरकार बटि नै विधानसभा बणाणा क मंजूरी मिळि ग्यें। त ऐ मामला मा राजनीति सुरू ह्वै ग्यें। कांग्रेस रायपुर मा राजधानी प्रस्तावित करणा कु सर्या ठिकरू पैल्यक मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के मुण्ड मा फोड़ि दे।
त दूसर तरफ भाजपा क मंसा पर भि सवाल उठणा छन। बल जब देरादूण मा विधानसभा भवन बणि जालु त राज्य आंदोलनकारियों अर प्रदेस के शहीद जौन गैरसैंण राजधानी कु सुपिन देखि छायीं ऊंकु सुपिनों क क्या होलू? त्रिवेन्द्र सिंह रावत के गैरसैंण घोषणा क क्या होलु?

साफ च बल देरादूण मा विधानसभा बणालि त ‘गैरसैंण’ सदनि खूंणि ‘गैर’ ह्वै जालु, किलैकि तब गैरसैंण प्रदेस क स्थायी राजधानी कबि भि नि बणि सकदी अर तब ‘रूड़ियों राजधानी ‘गैंरसैण’ रूड़ियोंक बाटू दय्खण खूंणि सदिन टपराणि हि राली।

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